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गरà¥à¤ में लड़की या लड़का होने के लकà¥à¤·à¤£
जब à¤à¤• औरत गरà¥à¤ धारण करती है, तो उसके साथ-साथ पूरा परिवार à¤à¤• सà¥à¤¨à¤¹à¤°à¤¾ खà¥à¤µà¤¾à¤¬ बà¥à¤¨à¤¨à¥‡ लगता है। घर में आने वाले ननà¥à¤¹à¥‡ मेहमान के सà¥à¤µà¤¾à¤—त के लिठतरह-तरह की तैयारियां शà¥à¤°à¥‚ हो जाती हैं। अब आने वाला मेहमान ननà¥à¤¹à¤¾ राजकà¥à¤®à¤¾à¤° होगा या राजकà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€, यह बात डिलीवरी के समय तक राज ही रहती है। दरअसल, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में जनà¥à¤® से पहले बचà¥à¤šà¥‡ का लिंग पता करना अपराध है। मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के इस लेख में हम बताà¤à¤‚गे कि पà¥à¤°à¤•ृति मनà¥à¤·à¥à¤¯ के लिंग का निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ कैसे करती है। साथ ही हम आपको उन पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ और पारंपरिक नà¥à¤¸à¥à¤–ों के बारे में à¤à¥€ बताà¤à¤‚गे, जिनकी मदद से बचà¥à¤šà¥‡ के लिंग का अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाया जाता रहा है।
लड़का या लड़की कैसे पैदा होती है?
जीव विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, महिलाओं और पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में दो तरह के यौन गà¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤° (सेकà¥à¤¸ कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤®) पाठजाते हैं। महिला के अंडाशय में XX कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® और पà¥à¤°à¥à¤· के शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ में XY कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® होता है। XX कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® लड़की और XY कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® लड़के का लिंग निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करते हैं। जब पà¥à¤°à¥à¤· के शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ का Y कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® महिला के अंडाशय के X कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® से निषेचित होता है, तो लड़का पैदा होता है। इसी तरह, अगर पà¥à¤°à¥à¤· के शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ का X कà¥à¤°à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® महिला के अंडाशय के X कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® से निषेचित होता है, तो लड़की पैदा होती है [1]।
गरà¥à¤ में लड़का होने के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ होते हैं, यह जानने के लिठलेख के अगला à¤à¤¾à¤— पढ़ें।
गरà¥à¤ में लड़का होने के लकà¥à¤·à¤£
गरà¥à¤ में पल रहा बचà¥à¤šà¤¾ लड़का है या लड़की, इसका 100% सही अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ नहीं लगाया जा सकता है। फिर नीचे दिठगठकà¥à¤› सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के आधार पर लोग गरà¥à¤ में लड़का होने की à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤µà¤¾à¤£à¥€ करते रहे हैं:
1. पेट का आकार
अगर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला का पेट à¤à¤¾à¤°à¥€ और नीचे की ओर à¤à¥à¤•ा हà¥à¤† है, तो इसे गरà¥à¤ में लड़के की मौजूदगी के लकà¥à¤·à¤£ के तौर पर देखा जाता है।
2. तà¥à¤µà¤šà¤¾ में बदलाव
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान तà¥à¤µà¤šà¤¾ में बदलाव आना à¤à¤• आम बात है। फिर à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ माना जाता है कि अगर गरà¥à¤ में लड़का है, तो गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के चेहरे पर दाने, मà¥à¤‚हासे और दाग ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिखने लगते हैं। इसके अलावा गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला का चेहरा à¤à¥€ मà¥à¤°à¤à¤¾à¤¯à¤¾-सा दिखने लगता है।
3. सà¥à¤¤à¤¨ के आकार में बदलाव
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान à¤à¤• महिला के शरीर में हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ की वजह से बहà¥à¤¤ सारे बदलाव होते हैं। इस दौरान औरत के सà¥à¤¤à¤¨ का आकार बढ़ता है, जिससे वह सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के लिठतैयार होती है। हालांकि, दोनों सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के आकार में थोड़ा फरà¥à¤• होता है। अगर दायां सà¥à¤¤à¤¨, बाà¤à¤‚ सà¥à¤¤à¤¨ से बड़ा और à¤à¤¾à¤°à¥€ हो, तो इसे गरà¥à¤ में लड़का होने का लकà¥à¤·à¤£ माना जाता है।
4. ठंडे पैर और रूखे हाथ
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पैरों का ठंडा रहना और हाथों का रूखा रहना गरà¥à¤ में लड़के की मौजूदगी की निशानी माना जाता है।
5. चटपटा à¤à¥‹à¤œà¤¨ करने की इचà¥à¤›à¤¾ होना
वैसे तो पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में कई तरह की चीजें खाने की इचà¥à¤›à¤¾ होती है, मगर गरà¥à¤ में लड़का होने पर चटपटी और नमकीन चीज़ें खाने की इचà¥à¤›à¤¾ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है।
6. दिल की धड़कन
गरà¥à¤ में पल रहे बचà¥à¤šà¥‡ का दिल à¤à¤• मिनट में लगà¤à¤— 140 बार धड़कता है। चूंकि लड़कों के दिल की धड़कन धीमी होती है, इसलिठअगर बचà¥à¤šà¥‡ का दिल à¤à¤• मिनट में 140 बार से कम धड़के, तो इसे गरà¥à¤ में लड़का होने का लकà¥à¤·à¤£ माना जाता है।
लड़का पैदा करने के लिठकà¥à¤¯à¤¾ करें?
जैसा कि हम आपको बता चà¥à¤•े हैं, बचà¥à¤šà¥‡ का लिंग Y कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® के वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° पर निरà¥à¤à¤° करता है। Y कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® वाले शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ छोटे होते हैं और ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तेज़ होते हैं। अगर ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के आखिरी दिन या उसके अगले दिन संà¤à¥‹à¤— किया जाठतो लड़का पैदा होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ अधिक होती है। ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के दिन योनी से होने वाला रिसाव चिकना और गाढ़ा होता है। रिसाव के इस लकà¥à¤·à¤£ के आधार पर ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के दिन की पहचान की जा सकती है।
गरà¥à¤ के लिंग निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ के अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ शटल पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ 1960 के दशक से पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ है। विवाहित जोड़े इसके 75% सफल होने का दावा करते हैं। शटल पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, à¤à¥à¤°à¥‚ण का लिंग तय करने में संà¤à¥‹à¤— की अवसà¥à¤¥à¤¾ ( पोज़ीशन) काफ़ी अहम à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥€ है। लड़का पैदा करने के लिà¤, संà¤à¥‹à¤— से समय सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ और पà¥à¤°à¥à¤· के शरीर की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¤¸à¥€ होनी चाहिठजिससे कि पà¥à¤°à¥à¤· के शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ महिला के अंडे में गहराई तक निषेचित हो सकें। जैसे कि महिला का पà¥à¤°à¥à¤· के ऊपर बैठकर संà¤à¥‹à¤— करने से लड़का पैदा होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है। इसके अलावा, शटल विधि के तहत à¤à¥€ लड़का पैदा करने के लिठओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के आसपास के दिनों में संà¤à¥‹à¤— करने की सलाह दी जाती है [2]।
à¤à¤¸à¤¾ विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ है कि पà¥à¤°à¥à¤· का बॉकà¥à¤¸à¤° या शॉरà¥à¤Ÿà¥à¤¸ पहनना नर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ को बढ़ाने के लिठअचà¥à¤›à¤¾ होता है। शॉरà¥à¤Ÿà¥à¤¸ या बॉकà¥à¤¸à¤° पहनने से अंडकोष (सà¥à¤•à¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¤®) का तापमान नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ रहता है। इससे अंडकोष में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ होता है। ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तंग अंडरवियर पहनने से अंडकोष का तापमान बढ़ जाता है और इससे शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में कमी आ सकती है।
लड़के को गरà¥à¤ में धारण करने के लिठआहार
अलकालाइन गà¥à¤£à¥‹à¤‚ वाला आहार और पोटाशियम यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार नर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखता है। नीचे कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ खाने-पीने की चीजों के नाम बताठगठहैं, जिनके सेवन से लड़के को गरà¥à¤ में धारण करने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है:
केला: केला पोटेशियम का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ होता है। पोटेशियम लंबे समय तक नर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं को जीवित और सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखता है। इससे शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं के अंडे में निषेचित होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है। साथ ही यह गरà¥à¤ में लड़का धारण करने के लिठà¤à¥€ उपयोगी साबित हो सकता है।
नींबू वंश (साइटà¥à¤°à¤¸) के फलों का सेवन: नींबू वंश के फलों में पà¥à¤°à¤šà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में विटामिन-सी और à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट पाया जाता है। अगर आप लड़का पैदा करने की इचà¥à¤›à¤¾ रखते हैं, तो आपको नींबू वंश के फल, जैसे कि अंगूर, संतरा, आदि का सेवन ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ करना चाहिà¤à¥¤.
मशरूम : मशरूम मे विटामिन-डी, पोटाशियम और सेलेनियम के अलावा à¤à¥€ बहà¥à¤¤ सारे पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ततà¥à¤µ होते हैं। इसलिà¤, मशरूम को नर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं की सेहत के लिठलाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• माना जाता है।
ज़िंक (जसà¥à¤¤à¤¾) से à¤à¤°à¤ªà¥‚र आहार: ऑयसà¥à¤Ÿà¤°, कदà¥à¤¦à¥‚ और मांस जैसे आहार में ज़िक पà¥à¤°à¤šà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में पाया जाता है। यह किसी महिला के गरà¥à¤ धारण करने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को बà¥à¤¾ देता है। पोषण विशेषजà¥à¤ž (नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¨à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ) बृजेट सà¥à¤µà¤¿à¤¨à¥€ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, ज़िंक ना केवल टेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ के सà¥à¤¤à¤° को बढ़ाता है, बलà¥à¤•ि नर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखते हà¥à¤ उनकी संखà¥à¤¯à¤¾ में वृदà¥à¤§à¤¿ à¤à¥€ करता है।
गà¥à¤²à¥‚कोज़ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र आहार: ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कैलोरी वाले à¤à¥‹à¤œà¤¨ में काफ़ी अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में गà¥à¤²à¥‚कोज़ मौजूद होता है। à¤à¤¸à¤¾ माना जाता है कि शरीर में गà¥à¤²à¥‚कोज़ का सà¥à¤¤à¤° जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होने से लड़का पैदा होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि ऊपर बताई गई किसी à¤à¥€ खादà¥à¤¯ सामगà¥à¤°à¥€ का सेवन शà¥à¤°à¥‚ करने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह जरूर लें।
जड़ी-बूटी और पूरक आहार की सहायता से लड़का पैदा करने के उपाय
संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहार के अलावा, आप कà¥à¤› खास जड़ी-बूटियों और पूरक आहार (हरà¥à¤¬à¥à¤¸ à¤à¤‚ड सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट) की सहायता से लड़का होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को बढ़ा सकती हैं। à¤à¤¸à¥€ ही कà¥à¤› जड़ी बूटियों और पूरक आहारों के नाम नीचे दिठगठहैं:
1. à¤à¤‚थोसायनिन
à¤à¤‚थोसायनिन à¤à¤• तरह का फà¥à¤²à¥‡à¤µà¥‹à¤¨à¥‰à¤‡à¤¡ होता है, जिसमें पà¥à¤°à¤šà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट मौजूद होते हैं। यह लाल, नीले और बैंगनी रंग के फलों और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में पाया जाता है। जैसे- लाल पà¥à¤¯à¤¾à¤œ, बैंगन, अंगूर, जामà¥à¤¨, टमाटर, राजमा, अनार, आदि। à¤à¤‚थोसायनिन योनि को आंतरिक रूप से सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखता है, जिससे नर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं को तेज़ी के साथ अंडाशय में निषेचित होने का मौका मिलता है।
2. à¤à¤²à¤¾à¤œà¤¿à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡
यह अमà¥à¤²à¥€à¤¯ यौगिक खासतौर पर फलों, जैसे- सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥‡à¤°à¥€,अनार और बà¥à¤²à¥‚बेरी में पाया जाता है। यह à¤à¤¸à¤¿à¤¡ नर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं को योनि में ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिनों तक जीवित रखता है।
3. गà¥à¤†à¤‡à¤«à¥‡à¤¨à¥‡à¤¸à¤¿à¤¨
पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से पाया जाने वाला यह पूरक आहार शरीर को निषेचन के अनà¥à¤•ूल बनाता है। यह पूरक आहार योनि गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ की घात (जिसे हम मà¥à¤¯à¥‚कस à¤à¥€ कहते हैं) को ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चिकना और पतला बनाता है। घात के चिकना और पतला होने पर नर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ आसानी से अंडाशय में पहà¥à¤‚च जाते हैं, जिससे लड़का पैदा होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है।
4. कौलिस सारà¥à¤œà¥‡à¤‚टोडॉकà¥à¤¸
यह à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ देशों में पाठजाने वाली à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक जड़ी-बूटी है। यह योनि और पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंगों को निषेचन पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के लिठपूरी तरह से तैयार करती है। इससे नर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं को ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिनों तक जीवित रहने और आगे बढ़ने का पूरा मौका मिलता है। इसके अलावा यह लड़का पैदा होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को à¤à¥€ बढ़ाता है।
5. आरà¥à¤œà¤¿à¤¨à¤¾à¤‡à¤¨
यह à¤à¥€ à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक पूरक आहार है। बीज वाली चीजों, जैसे- अखरोट, बादाम और पीकनà¥à¤¸ में आरà¥à¤œà¤¿à¤¨à¤¾à¤‡à¤¨ पà¥à¤°à¤šà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में पाया जाता है। आरà¥à¤œà¤¿à¤¨à¤¾à¤‡à¤¨ à¤à¥€ नर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं को अंडाशय में निषेचित करने में मदद करता है।
गरà¥à¤ में बेटी/लड़की होने के लकà¥à¤·à¤£
जिस तरह से गरà¥à¤ में लड़के की मौजूदगी का अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाया जा सकता है, ठीक उसी तरह से गरà¥à¤ में बेटी होने के लकà¥à¤·à¤£ की à¤à¥€ पहचान की जा सकती है। गरà¥à¤ में लड़की की मौजूदगी के कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ इस पà¥à¤°à¤•ार हैं:
1. दिल की तेज़ धड़कन
गरà¥à¤ में लड़के की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में लड़की की दिल की धड़कन तेज़ होती है। अगर अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड सà¥à¤•ैन से पता चलता है कि गरà¥à¤ में मौजूद बचà¥à¤šà¥‡ का दिल à¤à¤• मिनट में 140 से अधिक बार धड़क रहा है, तो इसे गरà¥à¤ में लड़की होने का लकà¥à¤·à¤£ माना जाता है।
2. जी मिचलाना और उबकाई आना
शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤¨à¥à¤¸à¥€ में जी मिचलाने और मितली की समसà¥à¤¯à¤¾ का ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होना, गरà¥à¤ में लड़की होने का संकेत माना जा सकता है।
3. पेट का आकार
अगर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने पर आपका पेट गोलाकार और ऊपर उठा हà¥à¤† है, तो इसे गरà¥à¤ में लड़की होने का संकेत माना जा सकता है।
4. मनोदशा में बदलाव
गरà¥à¤ में लड़की होने पर महिलाओं की मनोदशा बदलती रहती है। उनमें गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾, चिड़चिड़ापन, तनाव और अवसाद की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नज़र आने लगती है।
5. सà¥à¤¤à¤¨ के आकार में बदलाव
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान अपने सà¥à¤¤à¤¨ को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से देखें, इससे बचà¥à¤šà¥‡ का लिंग जानने में मदद मिल सकती है। अगर आपके बाà¤à¤‚ सà¥à¤¤à¤¨ का आकार दाà¤à¤‚ सà¥à¤¤à¤¨ से बड़ा है, तो इसे गरà¥à¤ में लड़की होने का लकà¥à¤·à¤£ माना जा सकता है।
6. लहसà¥à¤¨ से परीकà¥à¤·à¤£
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने पर लहसà¥à¤¨ खाने के बाद अगर आपके शरीर की गंध बदलती नहीं है, तो समà¤à¤¿à¤ कि गरà¥à¤ में लड़की है। दरअसल, गरà¥à¤ में लड़का होने पर शरीर के रोम छिदà¥à¤°à¥‹à¤‚ में से गंध आने लगती है।
7. मीठी चीज़ें खाने की इचà¥à¤›à¤¾
अगर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को अचानक से मीठी चीज़ें (मिठाई, चॉकलेट, आदि) खाने की इचà¥à¤›à¤¾ होने लगे, तो इसे गरà¥à¤ में लड़की होने का लकà¥à¤·à¤£ माना जाता है।
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लड़की पैदा करने के लिठकà¥à¤¯à¤¾ करें?
अगर आप लड़की पैदा करने की इचà¥à¤›à¤¾ रखती हैं, तो नीचे दिठगठइन तरीकों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकती हैं:
लिंग निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ के अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ से संबंधित शटल पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, लड़की पैदा करने की इचà¥à¤›à¤¾ रखने वाले जोड़ों को ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के दो-चार दिन पहले संà¤à¥‹à¤— करना चाहिà¤à¥¤ इस दौरान मादा शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं के अंडाशय में निषेचित होने की समà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बहà¥à¤¤ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। à¤à¤¸à¥‡ जोड़ों को ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के आसपास (जब योनि की घात बहà¥à¤¤ चिकनी और पतली हो) संà¤à¥‹à¤— करने से बचना चाहिà¤à¥¤
लड़की पैदा करने की चाहत रखने वाले जोड़े वीलन पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ का सहारा à¤à¥€ ले सकते हैं। इस पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ का संबंध à¤à¥€ लिंग निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ के अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ और शोध से है। इस पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ को 57% सफल माना जाता है। वीलन पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, लड़की पैदा करने के लिठओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के दो-तीन दिन पहले संà¤à¥‹à¤— करना चाहिà¤à¥¤ याद रखें कि वीलन और शटल पदà¥à¤§à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की सफलता का कोई वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ उपलबà¥à¤§ नहीं है।
संतान के रूप में लड़की की इचà¥à¤›à¤¾ रखने वाले दंपतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को संà¤à¥‹à¤— के लिठकोई ख़ास समय निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करने के बजाठज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ संà¤à¥‹à¤— करना चाहिà¤à¥¤ इससे X कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® (मादा कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤®) को अंडे में निषेचित होने के ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ अवसर मिलते हैं।
अगर आप लड़की पैदा करने की इचà¥à¤›à¤¾ रखती हैं, तो आपको पोटैशियम और नमक सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में लेना चाहिà¤à¥¤ आपको ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन से पहले कम नमक वाला आहार लेना चाहिठऔर संà¤à¥‹à¤— करना चाहिà¤à¥¤ दूसरे शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में कहें, तो आपको खाना पकाने में कम से कम नमक का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना चाहिà¤à¥¤ इसके अलावा à¤à¤¸à¥€ चीज़ों से परहेज करना चाहिà¤, जिनमें अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पोटैशियम पाया जाता है। जैसे- बà¥à¤°à¥‡à¤¡, ऑलिवà¥à¤¸, सी-फ़ूड, आदि।
à¤à¤¸à¤¾ माना जाता है कि अगर संà¤à¥‹à¤— से पहले पà¥à¤°à¥à¤· गरà¥à¤® पानी सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करे, तो लड़की पैदा होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है। दरअसल, Y कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® (नर कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤®) गरà¥à¤® तापमान को सहन नहीं कर पाते और नषà¥à¤Ÿ हो जाते हैं। इससे X कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® (मादा कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤®) को अंडे मे निषेचित होने के ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मौके मिलते हैं।
कोई महिला अपने शरीर में पीà¤à¤š के सà¥à¤¤à¤° को बढ़ाकर à¤à¥€ लड़की पैदा करने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को बà¥à¤¾ सकती है। अनानास, टमाटर और à¤à¤¸à¥€ चीज़ें अधिक खाकर जिनमें फ़ॉलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ पà¥à¤°à¤šà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में होता है, शरीर में पीà¤à¤š के सà¥à¤¤à¤° को बढ़ाया जा सकता है।
शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, कम कैलोरी वाली चीज़ें खाने से लड़की पैदा होने समà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठहोता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि शरीर में गà¥à¤²à¥‚कोज़ का सà¥à¤¤à¤° कम होने से Y कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® जलà¥à¤¦ नषà¥à¤Ÿ हो जाते हैं।
लड़की को गरà¥à¤ में धारण करने के लिठआहार
नीचे कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ खाने-पीने की चीजों के नाम बताठगठहैं, जिनके सेवन से लड़की को गरà¥à¤ में धारण करने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है:
अंडा: अंडों में पà¥à¤°à¤šà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और अमà¥à¤²à¥€à¤¯ à¤à¤¸à¤¿à¤¡ मौजूद होता है। नियमित रूप से अंडे खाने वाली महिलाओं के शरीर में पीà¤à¤š का सà¥à¤¤à¤° बॠजाता है। पीà¤à¤š का यह बढ़ा हà¥à¤† सà¥à¤¤à¤° नर कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® के लिठनà¥à¤•सानदेह और मादा कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® के लिठफ़ायदेमंद होता है।
हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚: हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¥›à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में बहà¥à¤¤ सारे पोषक ततà¥à¤µ और विटामिनà¥à¤¸ होते हैं। ये पोषक ततà¥à¤µ और विटामिनà¥à¤¸ मादा कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखते हैं और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आगे बà¥à¤¨à¥‡ में मदद करते हैं।
अंकà¥à¤°à¤¿à¤¤ और साबूत अनाज: अंकà¥à¤°à¤¿à¤¤ और साबूत अनाज में पाठजाने वाले मैगनीशियम और सेलेनियम जैसे खनिज न केवल हमारी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ शकà¥à¤¤à¤¿ को बढ़ाते हैं, बलà¥à¤•ि लड़की पैदा करने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ में à¤à¥€ वृदà¥à¤§à¤¿ करते हैं।
बीनà¥à¤¸: कई तरह के बीनà¥à¤¸, जैसे- राजमा, सेम, सोयाबीन, आदि खाने से à¤à¥€ लड़की होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ती है।
जड़ी-बूटी और पूरक आहार की सहायता से लड़की पैदा करने के उपाय
गरà¥à¤ धारण करते समय कई औरतों के मन में यह शंका होती है कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अà¤à¥€ पूरक आहार लेना चाहिठया नहीं। सही जानकारी के अà¤à¤¾à¤µ में कई बार वे पूरक आहार लेने से कतराती हैं। जबकि, कà¥à¤› खास तरह के पूरक आहार लेना गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं के लिठबहà¥à¤¤ ज़रूरी होता है।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लेने के बाद अपने पूरक आहारों, जैसे- विटामिन, मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, आयरन, फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ आदि के सेवन की मातà¥à¤°à¤¾ तय करें। इनके नियमित सेवन से आपकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ तो बà¥à¥‡à¤—ी ही, साथ ही लड़की के जनà¥à¤® की आशा रखने वाले जोड़ों को सकारातà¥à¤®à¤• परिणाम à¤à¥€ मिल सकता है।
इसके आलावा, कà¥à¤°à¥ˆà¤¨à¤¬à¥‡à¤°à¥€ के रस के साथ à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¥‹à¤«à¤¼à¤¿à¤²à¤¸ लेना अचà¥à¤›à¤¾ होता है। यह यीसà¥à¤Ÿ संकà¥à¤°à¤®à¤£ को रोकता है और शरीर में पीà¤à¤š के सà¥à¤¤à¤° को कम करता है। इससे लड़की को गरà¥à¤ में धारण करने में मदद मिलती है।
लिंग जानने के अनà¥à¤¯ तरीके
गरà¥à¤ में लड़का या लड़की की मौजूदगी से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में हम आपको ऊपर बता चà¥à¤•े हैं। आइà¤, अब हम आपको लिंग परीकà¥à¤·à¤£ के उन पारंपरिक तरीकों के बारे में बताते हैं, जिनका इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² लोग लंबे अरसे से कर रहे हैं। हालांकि, इन परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के नतीजे 100% सही नहीं होते हैं।
1. बेकिंग सोडा से लिंग परीकà¥à¤·à¤£
यह गरà¥à¤ में मौजूद बचà¥à¤šà¥‡ का लिंग जानने की à¤à¤• घरेलू विधि है। इस परीकà¥à¤·à¤£ से à¤à¤• दिन पहले गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को दिन à¤à¤° अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पानी पिलाà¤à¤‚। इसके बाद, अगले दिन गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के सà¥à¤¬à¤¹ के पहले पेशाब का नमूना लें और उसमें बराबर मातà¥à¤°à¤¾ में बेकिंग सोडा मिला दें। अगर इस मिशà¥à¤°à¤£ में à¤à¤¾à¤— बनने लगे (जिस तरह के à¤à¤¾à¤— पानी में ईनो मिलाने पर बनते हैं), तो मान लिया जाता है कि गरà¥à¤ में लड़का है। लेकिन, अगर बेकिंग सोडा मिलाने के बाद à¤à¥€ मिशà¥à¤°à¤£ में कोई हलचल नहीं हो, तो मान लिया जाता है कि गरà¥à¤ में लड़की है।
2. शादी की अंगूठी के साथ बचà¥à¤šà¥‡ का लिंग जानना
यह परीकà¥à¤·à¤£ à¤à¤• मज़ेदार खेल की तरह होता है और इसके सही होने का कोई वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ नहीं है। इस परीकà¥à¤·à¤£ को करने के लिठसबसे पहले बिसà¥à¤¤à¤° पर सीधे लेटें और अपनी शाà¥à¤¦à¥€ की अंगूठी को धागे से बांधकर पेट के ऊपर लटकाइà¤à¥¤ à¤à¤¸à¤¾ करने के लिठआप परिवार के किसी दूसरे सदसà¥à¤¯ की मदद à¤à¥€ ले सकती हैं। अब बिना किसी बाधा के अंगूठी को हिलने दें। कहते हैं कि अगर अंगूठी गोल-गोल घूमती है, तो लड़की और अगर à¤à¤• दिशा से दूसरी दिशा में जाती है, तो लड़का होता है।
3. चीनी चंदà¥à¤° कैलेंडर की मदद से लिंग जानना
इस कैलेंडर के ज़रिठकी जाने वाली गणना के सही होने का à¤à¥€ कोई वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ नहीं है। हालांकि, यह देखा गया है कि इससे मिलने वाले नतीजे 50% सही होती हैं।
इस परीकà¥à¤·à¤£ को करने के लिà¤, चीनी चंदà¥à¤° कैलेंडर कैलकà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤° में गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के जनà¥à¤® की तारीख और उसके गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने की तारीख डालें। अगर गरà¥à¤ धारण करने की तारीख याद ना हो, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° की ओर से बताई गई डिलीवरी की तारीख डालें। इसके बाद कैलकà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤° गणना करके बता देगा कि लड़का होगा या लड़की। अगर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला की जनà¥à¤® तिथि और चंदà¥à¤° महीने की तारीख, दोनों समान हैं, तो उसके गरà¥à¤ में लड़की है। लेकिन, अगर ये दोनों तारीखें अलग-अलग हैं, तो गरà¥à¤ में लड़का है। [3]
4. à¤à¥à¤°à¥‚ण के सिर के आकार से लिंग का अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाना
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड सà¥à¤•ैन में à¤à¥à¤°à¥‚ण के सिर की रूपरेखा को देखकर होने वाले बचà¥à¤šà¥‡ के लिंग का अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाया जा सकता है। हालांकि, सही अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ केवल à¤à¤¸à¥‡ अनà¥à¤à¤µà¥€ लोग ही लगा सकते हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लड़की और लड़के के सिर की आकृतियों का फ़रà¥à¤• मालूम हो। इस तरह का अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाने के लिà¤, à¤à¥à¤°à¥‚ण की उमà¥à¤° कम से कम 12 हफ़à¥à¤¤à¥‡ होनी चाहिà¤à¥¤
5. नब लिंग परीकà¥à¤·à¤£
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ 11 से 13 हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक à¤à¥à¤°à¥‚ण के पैरों के बीच टà¥à¤¯à¥‚बरकल नाम का à¤à¤• जननांग मौजूद होता है। इस जननांग को नब कहते हैं। यही जननांग à¤à¥à¤°à¥‚ण का लिंग निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करता है। अगर नब का कोण रीॠकी हडà¥à¤¡à¥€ से 30 डिगà¥à¤°à¥€ अधिक हो, तो यह गरà¥à¤ में लड़के की मौजूदगी का संकेत है। इसी तरह, अगर नब का कोण रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ से 30 डिगà¥à¤°à¥€ से कम है, तो गरà¥à¤ में लड़की की मौजूदगी का संकेत है।
नब लिंग परीकà¥à¤·à¤£ के ज़रिठबचà¥à¤šà¥‡ का लिंग जानने के लिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड सà¥à¤•ैन की ज़रूरत पड़ती है। सà¥à¤•ैन से मिली तसà¥à¤µà¥€à¤° में बचà¥à¤šà¥‡ का लिंग जानने के लिठउसकी रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ से नब का कोण मापना चाहिà¤à¥¤ [4]
अकà¥à¤¸à¤° पूछे जाने वाले सवाल
1. लड़की को गरà¥à¤ में धारण करने के लिठपीà¤à¤š का सà¥à¤¤à¤° कितना होना चाहिà¤?
लड़की को गरà¥à¤ में धारण करने के लिठ4 से 4.5 के बीच का पीà¤à¤š सà¥à¤¤à¤° सबसे अचà¥à¤›à¤¾ माना जाता है।
2. ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन को कैसे टà¥à¤°à¥ˆà¤• करें?
ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन को टà¥à¤°à¥ˆà¤• करने के लिठइन तरीकों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें:
पिछले मासिक धरà¥à¤® की अवधि के पहले दिन (LMP) को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखकर आप ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन को मैनà¥à¤¯à¥à¤…ल रूप से टà¥à¤°à¥ˆà¤• कर सकते हैं। उदाहरण के लिà¤, अगर किसी महीने की 1 तारीख आपकी LMP का दिन है, तो 14 तारीख आपके ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन का दिन होगा। इस महीने की 10 तारीख से लेकर 17 तारीख तक की अवधि को आपके पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ दिनों के रूप में गिना जाà¤à¤—ा। यह गणना ऑनलाइन ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन कैलकà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤° की मदद से à¤à¥€ की जा सकती है।
अपने शरीर के तापमान की निगरानी करके à¤à¥€ आप ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन को टà¥à¤°à¥ˆà¤• कर सकते हैं। इसके लिठआपको रोज़ सà¥à¤¬à¤¹ उठकर थरà¥à¤®à¤¾à¤®à¥€à¤Ÿà¤° से अपने शरीर का तापमान मापना होगा। रोज़ाना के इस आंकड़े को किसी डायरी में नोट करते जाà¤à¤‚। इसके बाद à¤à¤• महीने के आंकड़े को देखकर पता लगाà¤à¤‚ कि आपके शरीर का तापमान किस दिन सामानà¥à¤¯ से अधिक रहा है। चूंकि ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के दिन शरीर का तापमान सबसे अधिक होता है, इसलिठआप इस विधि से आसानी से ‘ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन डे’ का पता लगा सकते हैं।
अपनी योनि गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ की घात (जिसे हम मà¥à¤¯à¥‚कस à¤à¥€ कहते हैं) की जांच करके à¤à¥€ ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के दिन का पता लगा सकते हैं। ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के दिन यह घात सबसे अधिक गाà¥à¥€ और चिकनी होती, जबकि सामानà¥à¤¯ दिनों में यह घात पतली होती है।
आपका शरीर कई दूसरे संकेतों के ज़रिठà¤à¥€ आपको ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के दिन की जानकारी देता है। जैसे कि मासिक चकà¥à¤° के बीच योनि से ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ में दरà¥à¤¦ होना, सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का नाजà¥à¤• होना (जैसा कि हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² बदलाव के समय होता है) आदि। ये लकà¥à¤·à¤£ बताते हैं कि आपका ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन का समय चल रहा है।
इसके अलावा, ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन के दिन का पता लगाने के लिठआप दवा दà¥à¤•ानों पर मिलने वाले ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन टेसà¥à¤Ÿ किट का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¥€ कर सकती हैं।
याद रखें कि बचà¥à¤šà¥‡ कà¥à¤¦à¤°à¤¤ का तोहफा होते हैं और तोहफे को हर रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार किया जाना चाहिà¤à¥¤ साथ ही बेटा और बेटी में à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ करना संकीरà¥à¤£ मानसिकता को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है। इसलिà¤, दोनों की परवरिश सामान रूप से करनी चाहिà¤à¥¤ साथ ही घर में ननà¥à¤¹à¥‡ राजकà¥à¤®à¤¾à¤° या ननà¥à¤¹à¥€ परी के आगमन की तैयारी कर रहे अपने दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ और परिचितों के साथ इस लेख को साà¤à¤¾ करना न à¤à¥‚लें।
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